N.Padmasri
मेरी कामना
यह् सुन्दर वन तडपता है मेरा मन । यह् सुरम्य फूल नाचता है मेरा दिल । यह् मन चाहे खुष्बू टालता है मेरी खेद । यह् भ्रमर की झंकार सुनाता है एक रस राग झर । यह् नाचता मोर सजाता है मेरा विचार । कुहु कुहु कर्ता कोयल जगाती है मेरा संयाल । यह् समुन्नत ऊँचे पेड दिलरुवाती है जैसे उढ उनसे मिल्झुलकर रहना यही है मेरी कामना । यह् मनुष्यारण्य मे जीना के बिना मधुर है प्रक्रुती को सेचना
यह् सुन्दर वन तडपता है मेरा मन । यह् सुरम्य फूल नाचता है मेरा दिल ।
यह् मन चाहे खुष्बू टालता है मेरी खेद । यह् भ्रमर की झंकार सुनाता है एक रस राग झर । यह् नाचता मोर सजाता है मेरा विचार । कुहु कुहु कर्ता कोयल जगाती है मेरा संयाल । यह् समुन्नत ऊँचे पेड
दिलरुवाती है जैसे उढ उनसे मिल्झुलकर रहना यही है मेरी कामना । यह् मनुष्यारण्य मे जीना के बिना मधुर है प्रक्रुती को सेचना
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